मिशन मंगल फिल्म रिव्यु

बॉलीवुड में आजकल बायोपिक या तो सच्ची घटनाओं पर फिल्में बनाने का चलन चल रहा है। आज 15 अगस्त के मौके पर अक्षय कुमार की फिल्म मिशन मंगल(Mission Mangal) रिलीज हुई है। फिल्म में भारत के मंगल ग्रह पर पहुंचने का सफर दिखाया गया है कि कैसे इसरो के वैज्ञानिक इस मिशन को सफल बनाते हैं। अक्षय के साथ इस फिल्म में उनकी लेडी गैंग दिखाई गई है जो अपने अनोखे दिमाग और स्टाइल से इस मिशन को सफल बनाती है। अक्षय के साथ विद्या बालनतापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, सोनाक्षी सिन्हा, नित्या मेनन, शर्मन जोशी और एच जी दत्तारेया अहम भूमिका निभाते नजर आए हैं। फिल्म को जगन शक्ति ने डायरेक्ट किया है।

कहानी:

फिल्म की कहानी इसरो के मंगल मिशन पर है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे इसरो के वैज्ञानिक भारत को मंगल पर ले गए। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। जैसे हर परिस्थिति को महिलाएं संभाल लेती हैं ठीक उसी तरह इस मिशन में छोटी-छोटी चीजों को अपने हिसाब से सही करती हैं। कहानी की शुरूआत में अक्षय कुमार(राकेश धवन) एक सैललाइट लॉन्च करते हैं मगर विद्या बालन(तारा) की एक गलती की वजह से वह लॉन्च फेल हो जाता है। जिसका सारा इल्जाम राकेश अपने ऊपर ले लेते हैं। इसके बार इसरो में एंट्री होती है नासा के वैज्ञानिक दिलीप ताहिर (रुपर्ट देसाई) जो राकेश के द्वारा की गई हर चीज पर सवाल उठाते हैं। इसके बाद राकेश को 2022 में होने वाले मार्स मिशन में डाल दिया जाता है। जो उस समय लगता है कि नामुमकिन था। मगर किसे पता था इस मार्स मिशन को सफल बनाया जा सकता है। विद्या बालन अपने घरेलू तरीके से भारत को मंगल पर जाने का मॉडल बनाती हैं। इसे राकेश इसरो के हैड सामने पेश करते हैं पहले तो इस तरीके पर कोई विश्वास नहीं करता है मगर इसके बाद सब अक्षय और विद्या के फेवर में होने लगता है और उनकी टीम में लोगों को शामिल किया जाता है और शुरू हो जाती है भारत के मंगल पर जाने क तैयारी। इसी बीच सभी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है मगर सब इसे संभाल लेते हैं।

एक्टिंग:
राकेश धवन के किरदार में अक्षय कुमार की एक्टिंग खास नहीं थी। वह कहीं जगह ओवरड्रेमेटिक लग रहे थे। पंच लाइन्स काफी दी गई थीं मगर हर पंच पर हंसी आए ऐसा जरुरी नहीं है। अक्षय के बाद विद्या बालन खास भूमिका में थी। विद्या बालन को किरदार ऐसा है जो सब संभाल लेती है। घर से लेकर ऑफिस बच्चे सभी को। हर चीज से ज्ञान लेना और उसे अपने काम में इस्तेमाल करना। विद्या बालन का किरदार सीरियल्स की बहू जैसा लग रहा था जो हर परेशानी के बाद भी सब अच्छे तरीके से हैंडिल कर लेती है। उसके बाद सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, नित्या मेनन, शर्मन जोशी यह सब कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं उनके पास कहानी में कुछ खास करने को नहीं था जिसमें वह अपनी एक्टिंग का जादू दिखा सकें।

 

डायरेक्शन:
फिल्म ज्यादातर इसरो के इर्द-गिर्द दिखाई गई है। सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है। सैटलाइट के मंगल पर जाने के सीन्स को काफी शानदार तरीके से दिखाया गया है। ये कुछ सीन्स हैं जो दर्शकों को बांधकर रखते हैं।

खामियां:
फिल्म की कहानी सभी को पता ही है। मगर इसे एंटरटेनिंग बनाने के चक्कर स्क्रिप्ट खोई हुई लगने लगती है। जो आपको बांध नहीं पाती है। ओवरड्रमेटिक होने की वजह से आप कहानी से कनेक्ट नहीं कर पाते हैं।

क्यों देखें:
टैक्नोलॉजी को बहुत आसान तरीके से समझाया गया है जिसे आम इंसान आसानी से समझ सकता है। 15 अगस्त के मौके पर भारत के मंगल पर जाने की कहानी पर्दे पर दिखाई गई है। इस कहानी को जानने के लिए आप इसे देख सकते हैं

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