सांड की आंख फिल्म रिव्यु

सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती है। जब मन चाहे तब आप इन्हें पूरा कर सकते हैं। ऐसी ही कहानी है तोमर परिवार की बहू चन्द्रो और प्रकाशी तोमर की। चन्द्रो और प्रकाशी ने अपने सपनों को 60 साल की उम्र में पूरा किया। साथ ही पूरे देश की महिलाओं को प्रेरित किया। चन्द्रो और प्रकाशी को अपना सपना पूरा करने के लिए किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा यह है फिल्म ‘सांड की आंख’ की कहानी। फिल्म में चन्द्रो तोमर का रोल भूमि पेडनेकर और प्रकाशी तोमर का रोल तापसी पन्नू ने निभाया है।

कहानी:

सांड की आंख की कहानी है बागपत के जोहर गांव की चन्द्रो और प्रकाशी तोमर की। तोमर परिवार की बहू चंद्रो और प्रकाशी अपना पूरा जीवन घर, खाना, पति की सेवा और खेत जोतने का काम करती हैं। दोनों को 60 साल की उम्र में अपने शूटिंग के हुनर के बारे में पता लगता है। मगर शूटर बनना दादियों के लिए आसान नहीं होता है। इसके लिए ट्रेनिंग चाहिए होती है और सबसे बड़ी बात घर से बार जाकर टूर्नामेंट में भाग लेना। जो घर के मर्द उन्हें कभी करने नहीं देते। कैसे 60 साल की उम्र में दोनों दादियां शूटर बनती हैं इसके लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

एक्टिंग:
फिल्म में तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर दोनों की ही एक्टिंग शानदार है। 60 साल की दादी के किरदार में भी दोनों से खुद को बखूबी ढाल लिया है। तापसी और भूमि के साथ फिल्म में प्रकाश झा, विनीत कुमार सिंह और पवन चोपड़ा ने भी अपने किरदार बखूबी निभाए हैं।

डायरेक्शन:
सांड की आंख को तुषार हीरानंदानी ने डायरेक्ट किया है। फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है। कहीं भी आपको फिल्म से छूटा हुआ महसूस नहीं होता है। फिल्म शुरू से आखिरी तक आपको बांधे रखती है।

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